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जिप उपाध्यक्ष ने भी भाजपा का मोह त्यागा
शहडोल। (संजय गर्ग) जैसे तैसे भाजपा शहडोल लोकसभा सीट के बीते दिनों के अंतर्कलह से जूझती हुई चुनावी माहौल बनाने के लिए जनता के दरबार में लोगों से भारतीय जनता पार्टी के कमल निशान पर बटन दबाने की गुजारिश करने हर विधानसभा क्षेत्र में दस्तक दे मोदी सरकार योजनाए बताते हुए स्थानीय मुद्दे पार्टी की टिकट पर आयातित प्रत्याशी पर शिकवा शिकायत वाला बड़ा डैमेज कंट्रोल कर पूरा ध्यान संसदीय क्षेत्र की सीट गवाना ना पड़े भाजपा संगठन ने पूरी ताकत झोकी है। परंतु चुनाव के मात्र 12 दिन बचे हैं और इधर भाजपा की जिला पंचायत उपाध्यक्ष पूर्णिमा तिवारी भाजपा सदस्यता से इस्तीफा देकर तमाम भारतीय जनता पार्टी के दायित्व छोड़ कर साबित कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी का संसदीय क्षेत्र शहडोल की सीट डूबती नैय्या मे सवार है जिन्हें एहसास हो रहा है वो भाजपा कि डूबती नांव से छलांग लगा कर सेफसाइड तलाश रहे हैं सूत्रों के हवाले से खबर यह भी है कि लोकसभा चुनाव के दौरान ज्ञान सिंह के बगावती सुर को हवा भाजपा के जि मेदार पदाधिकारियो ने ही दिया था परंतु मोदी फैक्टर की बदौलत लोकसभा चुनाव जीतने की रणनीति इस बार भारी पडने वाली है इस इस्तीफा वाली खबर से राजनीति में भाजपा की हडकंप मचा हैंए और मान मुनौव्वल का दौर शुरू हो गया। हालांकि जि मेदार पदाधिकारी सक्रिय भूमिका निभाने वाले लोगों की अनदेखी करना भाजपा शीर्ष नेताओं को भारी पड़ गया है। जिसकी बानगी लोकसभा चुनाव में दिखा रही हैं पुष्ट खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री कमलनाथ 17 अप्रैल बुधवार ब्यौहारी मे सीधी लोकसभा प्रत्याशी अजय सिंह राहुल के लिए वोट मांगेगे इस दौरान चुनावी सभा मे लगभग एक सैकड़ा भाजपा नेता कांग्रेस मे शामिल होने की खघ्बर है जिसमें जिला पंचायत उपाध्यक्ष पूर्णिमा तिवारी प्रमुख रूप से शामिल होगी् पूर्णिमा तिवारी भाजपा की सक्रिय भूमिका निभाने वाली कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में भारतीय जनता पार्टी के तमाम छोटे बडे कार्यक्रम में मौजूदगी दर्ज करती हुई देखी गई यह अनदेखी ही संभवतरू भाजपा के शीर्ष नेताओ को भारी पड़ गई। पूर्णिमा तिवारी जिला पंचायत शहडोल की उपाध्यक्ष के साथ साथ प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महिला मोर्चा हैं और राष्ट्रीय ब्राह्मण समाज संघ की प्रदेश संगठन मंत्री, महिला जैसे अहम पदो पर अपने दायित्वों का निर्वाहन करते रही है और कहीं ना कही भाजपा मे इस महिला नेत्री की अनदेखी हुई। गौरतलब हो कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा की पूर्व महिला विधायक वर्तमान कांग्रेस लोकसभा चुनाव प्रत्याशी प्रमिला सिंह ने भारतीय जनता पार्टी मे महिला नेत्रियो को तरजीघ्ह नही देने से नाराज होकर ही कांग्रेस का दामन थामा था जो भाजपा शहडोल के स्थानीय संगठन की आज तक ऑखो की किरकिरी बनी हुई है शहडोल जो भाजपा का गढ़ माना जा रहा था अब कुछ पदाधिकारियो की लापरवाही तानाशाही के चलते संसदीय सीट खोने की कगार पर है यद्यपि प्रदेश संगठन शहडोल संसदीय सीट हाराने की तैयारी करने पर आमादा विशेषाधिकार जमाए लोगों को यूँ ही तरजीघ्ह देती रहेगी तो दिन अब करीब है डैमेज कंट्रोल कराना नामुमकिन हो सकता है।

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