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रायपुर। स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के नजरिए से शुरू की गई राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का लाभ अब हितग्राहियों को नहीं मिल पाएगा। सूत्रों का कहना है कि कृषि मंत्री ने पहली विभागीय बैठक में सभी योजनाओं पर चर्चा करने के बाद फिलहाल इस योजना के तहत नए आवेदन स्वीकृत करने पर रोक लगा दी है। जिला विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना का लाभ ले रहे हितग्राहियों को अभी लगभग 15 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। अकेले रायपुर में हितग्राहियों को लगभग एक करोड़ रुपये देने हैं। इसलिए नए आवेदन फार्म का वितरण फिलहाल बंद कर दिया गया है।

रायपुर में 50 आवेदन

योजना का लाभ लेने के लिए चुनाव से पहले ही पशुधन विकास विभाग रायपुर में लगभग 40 आवेदन आए। पिछले दो वर्षों में रायपुर सहित प्रदेश भर से लगभग 392 लोग इस योजना से जुड़े। प्रदेश के सभी 27 जिलों में नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बस्तर नक्सलवाद प्रभावित जिलों को छोड़कर अन्य जिलों में योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राहियों के आवेदन आ रहे हैं। योजना का लाभ लेने के लिए कई लोग विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनके आवेदन स्वीकृत नहीं किए जा रहे हैं।

वेबसाइट से योजना गायब

पशुधन विभाग में कुल आठ योजनाएं चल रही हैं। इसकी वेबसाइट से अभी राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना गायब हो गई है। इस योजना का नाम तो दर्ज है, लेकिन इस संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो रही है। योजना के बंद होने की बात अधिकारी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि सत्र 2018-19 में विभाग को मिले 15 करोड़ रुपये पुराने हितग्राहियों को दे दिए गए। लगभग इतनी ही राशि पुराने हितग्राहियों को और भुगतान करने हैं। इससे लग रहा है कि विभाग में बजट की कमी है।

क्या है योजना

छत्तीसगढ़ शासन पशुधन विकास विभाग अंतर्गत 2016-17 में स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के लिए आधुनिक डेयरी फार्म की स्थापना, प्रदेश में पिछड़े क्षेत्रों में डेयरी उद्यमिता को व्यावसायिक स्तर पर पहुंचाने के ध्येय से पिछली सरकार ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना शुरू की। इसके अंतर्गत भारतीय दुधारू नस्ल की गाय (साहीवाल, रेडसिंघी, गिर, थारपारकार आदि) उन्नत संकर नस्ल की गाय, उन्नत नस्ल की भैंस पालन के लिए कुल नौ लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके तहत न्यूनतम दो और अधिकतम 15 पशु पाले जा सकते हैं। पशु आवास के लिए 1.50 लाख, जल व्यवस्था के लिए 1 लाख, वर्मी कंपोस्ट के लिए 50 हजार निर्धारित है। सामान्य वर्ग को वित्तीय लागत का 50 फीसद, अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग को 66.6 फीसद सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी राशि बैंकों के माध्यम से हितग्राहियों के खाते में जमा की जाती है।

-संचालित वितरण योजनाएं

1-नर बकरा वितरण योजना

2-नर सूकर वितरण योजना

3- बकरी पालन योजना

4-बैकयार्ड कुक्कुट वितरण योजना

5-राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजन (फिलहाल रोक)

6-उन्नत मादा वत्सपालन योजना

7-सांड वितरण योजना

8-सूकर त्रयी वितरण योजना

पहले बची राशि को देने

राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना को बंद करने के लिए कोई आदेश विभाग को नहीं आया है। जिन हितग्राहियों के आवेदन पूर्व में स्वीकृत हैं, पहले उन्हें पूरा करना है इसलिए इस वर्ष नए हितग्राहियों के आवेदन स्वीकृत नहीं किए जा रहे हैं। डॉ. अजय अग्रवाल, पशु चिकित्सक, पशुधन विभाग रायपुर

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